तनिक मुझे विश्राम नहीं, जी तोड़ परिश्रम करता हूँ. सर्दी-गर्मी-वर्षा से, मैं भला कहाँ डरता हूँ. कोई पूछे मुझसे, उससे पहले ही कह देता हूँ. बस्तर की मिट्टी से निर्मित मैं, सब हँसकर सह लेता हूँ.
✍अशोक नेताम"बस्तरिया" 📞9407914158
एक टिप्पणी भेजें
बरसात के पानी से नमी पाकर धरती खिल गई है.कई हरी-भरी वनस्पतियों के साथ ये घास भी खेतों में फैली हुई लहलहा रही है.चाटी (चींटी) क...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें